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17व सद क अत और 18व सद क पररभ म मवत म कसन एव जमदर वदरह

Year: 2024
Type: article
Abstract: हम जानते हैं कि मुगल साम्राज्य, जो कि पूरे एशिया का सबसे मजबूत साम्राज्य था, लगभग 150 सालों तक एक केंद्रीकृत एवं सुदृढ़ स्थिति में खड़ा रहा। मुगल साम्राज्य की असली ताकत उसकी शक्तिशाली अश्वरोही सेना थी जो मनसबदारी व्यवस्था से संचालित होती थी। मनसबदारों को अपनी जागीरो में कुशल संचालन करके भूराजस्व एकत्रित करना होता था जिसके प्रयोग से वह अपनी सेना को शक्तिशाली बनाते थे। लेकिन मनसबदारों का मुख्य उद्देश्य किसानों से अधिक से अधिक भूराजस्व वसूल करना था जिसके कारण किसानों का शोषण होता था। 18वीं शताब्दी की शुरुआत में ही यह साम्राज्य लड़खड़ाने लगा और शीघ्र ही धराशाही हो गया। जब मुगल साम्राज्य में मनसबदारी एवं जागीरदार संकट उत्पन्न हुआ तब किसानों पर होने वाला शोषण और तीव्र हो गया दूसरी तरफ से इजारादारी व्यवस्था के अंतर्गत उनके ऊपर बहुत सारे गैर प्रथागत करांे को थोप दिया गया। इसलिए किसानों को शाही मनसबदारों एवं इजारेदारों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करने पर विवश होना पड़ा। इस शोध पत्र में मेवात क्षेत्र के अंतर्गत किसानों एवं जमींदारों के इजारादारी व्यवस्था के खिलाफ हुए विद्रोह का विशेष वर्णन करने का प्रयास किया गया है।
Language: Hindi
Subfield: Philosophy
Open Access status: diamond
OpenAlex ID: W4404826787
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