Year: 2025
Type: article
Abstract: मैकियावेली के द्वारा पश्चिमी चिंतन में पहली बार राजनीति को शक्ति राजनीति के रूप में चित्रित किया गया और उसने प्रिंस में लिखते हुए कहा कि शक्ति का अर्जन और शक्ति को बनाये रखना राजकुमार का मूल उद्देश्य है और उसके अनुसार राज्य को शक्तिशाली बनाये रखने के लिए राजा नैतिक व्यवहार भी अपना सकता है, परन्तु नैतिक होना राजा का उद्देश्य नहीं है बल्कि नैतिकता राजा के लिए साधन है और उसके अनुसार राज्य को शक्तिशाली बनाये रखने के लिए राजा को धूर्तता, चालाकी, धोखेबाजी सभी उपायों का प्रयोग करना चाहिए। इसलिए पश्चिमी चिन्तन में मैकियावेली पहला विचारक है जिसने राजनीति और नैतिकता के बीच विभाजन कर दिया, जिसका अभिप्राय है कि राजकुमार के कार्यों का नैतिक मूल्यांकन करना उचित नहीं है। मैकियावेली का चिंतन न तो नैतिक है और न ही अनैतिक, बल्कि यह नैतिकता से तटस्थ है अथवा अलग है जिसका अभिप्राय है कि राजकुमार को कार्य करते समय नैतिक मानदंडो के पालन की आवश्यकता नहीं है बल्कि उसे राज्य को शक्तिशाली बनाये रखने का प्रयत्न करना चाहिए और राज्य को शक्तिशाली बनाये रखने के लिए उसके द्वारा संपादित सभी कार्य नैतिक हैं। मैकियावेली ने शासनकला का विचार प्रतिपादित करते हुए शासन कला को केंद्रीय महत्व प्रदान किया गया। मैकियावेली ने यह माना कि राज्य की सुरक्षा साध्य है जिसके लिए किसी भी साधन का प्रयोग किया जा सकता है। जिसका यह भी अभिप्राय होता है कि राजा के कार्यों पर नैतिकता का बंधन लागू नहीं होगा। इस प्रकार यह शोध पत्र मैकियावेली के शक्ति राजनीति के विचार की प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।
Author: Rohit Singh
Institution: Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University
Language: English
Subfield: History
Field: Arts and Humanities
Domain: Social Sciences
Open Access status: hybrid
OpenAlex ID: W4411467194
