Year: 2025
Type: article
Abstract: प्रस्तावना :- जनजातीय समाज में शराब का सेवन प्राचीन काल से ही चलता आ रहा है, क्योंकि शराब जनजातीय समाज की संस्कृति से जुड़ा हुआ है। जनजातीय समाज समय-समय पर शराब अपने कुलदेव को भी अर्पण करते हैं। संथाल जनजाति अपने घर पर जब पूजा पाठ करते हैं और किसी प्रकार के बलि देते हैं, उस समय अपनी देवता को शराब अर्पण करते हैं। इसलिए शराब उनकी संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। झारखंड राज्य के जामा प्रखंड के अंतर्गत चिकनियां ग्राम पंचायत के लकरजोरिया गांव में संथाल जनजाति समाज के लोग निवास करते हैं। यह गांव में शराब बनाने से लेकर बेचने तक के परंपरा है। क्योंकि यहां की महिलाएं शराब बनाती है और अपने घर के बगल में एक फील्ड है वहां पर जाकर शराब बेचती है। शराब इसलिए महिलाएं बेचती है, क्योंकि शराब बेचने से उन्हें कुछ आय प्राप्त हो जाता है। लेकिन शराब सेवन करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ता जा रहा है। जिसका परिणाम यह है कि लोग शराब के आदि हो चुके हैं, जिसके कारण अधिक मात्रा में शराब सेवन करने से यहां के लोगों की काफी स्वास्थ्य समस्या हो रहा है। यहां तक की शराब सेवन करने की वजह से लोगों की मृत्यु तक भी हो चुका है। यह जनजाति लोग एक भोले-भाले प्रवृत्ति के हैं। लेकिन समझ नहीं पाते हैं कि शराब का दुष्प्रभाव क्या है, शराब के दुष्प्रभाव से हमेशा अनजान रहे हैं। जिसका नतीजा इस जनजाति समुदाय के लोगो को भोगना पड़ रहा है।
Author: Dr. Sandeep kumar Mandal
Language: English
Subfield: Anthropology
Field: Social Sciences
Domain: Social Sciences
Open Access status: bronze
OpenAlex ID: W4412824476
