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सइबर अपरध स महलओ क गरम पर सकट : वधक परवधन क परभवशलत क वशलषण

Year: 2025
Type: article
Abstract: महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते साइबर अपराध डिजिटल युग में एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक और विधिक चिंता का विषय बन गए हैं। ये अपराध – जैसे ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबर स्टॉकिंग, रेवेंज पोर्न (बदले की भावना से अश्लील सामग्री साझा करना) और छवि से छेड़छाड़ – न केवल पीड़िताओं की निजता और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा और सुरक्षा पर भी दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ते हैं। इस शोध आलेख में महिलाओं की गरिमा पर साइबर अपराधों से उत्पन्न संकट की व्यापक पड़ताल की गई है, साथ ही भारत में उपलब्ध कानूनी ढांचे की प्रभावशीलता का विश्लेषण किया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 तथा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं द्वारा साइबर अपराधों पर काबू पाने के प्रयास हो रहे हैं, परंतु कई मामलों में कानूनी प्रावधान अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। प्रमुख विधिक प्रावधानों और न्यायिक निर्णयों (जैसे ऋतु कोहली मामला, 2001) के अध्ययन से पता चलता है कि कानून समय के साथ विकसित तो हुआ है, परंतु अभी भी अपराधियों को रोकने एवं पीड़ितों को न्याय दिलाने में अनेक चुनौतियाँ बरकरार हैं। अंततः, इस आलेख में मुख्य बाधाओं की पहचान कर सुझाव दिए गए हैं कि किस प्रकार विधि-प्रवर्तन, नीतियों और जागरूकता उपायों में सुधार करके साइबर स्पेस को महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।
Authors: Jyoti Chandel, Dr. Aruna Sethi
Institution: Vikram University
Language: English
Open Access status: diamond
OpenAlex ID: W4416426599
FWCI:
Cites: 1
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