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Govardhan Puja: A festival dedicated to the conservation of nature, environment and cattle in tribal society

Year: 2025
Type: article
Abstract: आदिवासी समाज में गोवर्धन पूजा का विशेष सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व है। यह पर्व प्रकृति, पशुधन और मानव के पारस्परिक संबंध को दर्शाता है। गोवर्धन पूजा का पर्व दीपावली के अगले दिन मनाया जाता है और इसे कई स्थानों पर अन्नकूट पर्व या गोवर्धन महोत्सव के रूप में भी जाना जाता है। आदिवासी समुदाय इसे ‘खेखरा’ कहते हैं। इस दिन गाय-बैल जैसे पशुधन की पूजा करते हैं, क्योंकि ये उनकी आजीविका और कृषि संस्कृति के प्रमुख आधार होते हैं। गोबर से गोवर्धन देवताओं की आकृति बनाकर उस पर फूल, कुमकुम, चावल, हल्दी, और जल अर्पित किया जाता है। यह पर्व भूमि, जल, वनस्पति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। इस दिन सामूहिक रूप से ग्राम देवी-देवताओं की आराधना, लोकगीत, नृत्य, और अन्नकूट भोज का आयोजन किया जाता है। यह न केवल धार्मिक विश्वास का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता, पर्यावरण संरक्षण और कृषि जीवन के प्रति सम्मान का भी संदेश देता है। संक्षेप में, आदिवासी समाज में गोवर्धन पूजा अध्यात्म, पर्यावरण, संस्कृति और सामुदायिक जीवन का संगम है, जो प्रकृति के साथ संतुलित सह-अस्तित्व की भावना को सशक्त बनाता है।
Language: English
Subfield: Museology
Open Access status: hybrid
OpenAlex ID: W4417295201
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