Year: 2025
Type: article
Abstract: भारत विविधताओं का देश है। क्षेत्र की समस्याओं के लिए उस क्षेत्र का प्रतिनिधि विधानमंडल या संसद में चुनकर जाता है। बुन्देलखण्ड एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ की समस्याएं बड़ी जटिल हैं। बुन्देलखण्ड की समस्याओं को बुन्देलखण्ड का व्यक्ति ही अधिक गहराई से समझ पाता है। बुन्देलखण्ड भारत वर्ष में इतिहास की दृष्टि से पौराणिक काल से जुड़ा हुआ है। इसके इतिहास पर चर्चा करना और उसकी व्याख्या करना एक बड़ा ही कठिन कार्य है। आजादी के बाद बुन्देलखण्ड के बड़े-बड़े नेताओं ने विधानमण्डल और संसद में बुन्देलखण्ड की समस्याओं को रखा और बुन्देलखण्ड के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बुन्देलखण्ड को एक ऐसे नेता की जरूरत है, जो शिक्षा से जुड़ा हुआ हो या तो स्वयं एक शिक्षक रहा हो। कहते हैं कि शिक्षा या ज्ञान में किसी क्षेत्र की संस्कृति का निर्माण करने की शक्ति होती है। बुन्देलखण्ड की समस्याओं को शिक्षक बेहतर ढंग से समझते हैं। यदि शिक्षक ही एक राजनेता के रूप में विधानमंडल और संसद में क्षेत्र की समस्याओं को रखे तो शासन और प्रशासन को समस्याओं के निराकरण में आसानी होगी। किसी क्षेत्र की समस्याओं को अगर वास्तविक रूप में जानना है तो इसके लिए उस क्षेत्र के शिक्षक से चर्चा करनी चाहिए क्योंकि किसी भी क्षेत्र का शिक्षक ही तीन पीढ़ियों से जुड़ा होता है। वह तीन पीढ़ियों की समस्याओं को जानता है। डॉ. बाबूलाल तिवारी एक ऐसे ही शिक्षक और राजनेता हैं जो लगातार विधानमंडल में उत्तर प्रदेश सरकार को क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराकर समस्याओं के निराकरण कराने में सदैव अपना योगदान देते हैं।
Authors: VISHAL SHARMA, PRITI SHIVHARE
Institution: Bundelkhand University
Language: English
Subfield: Sociology and Political Science
Field: Social Sciences
Domain: Social Sciences
Open Access status: hybrid
OpenAlex ID: W4417322761
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